लोक-संस्कृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता - त्रिभुवन सिंह चौहान, वरिष्ठ पत्रकार

लोक-संस्कृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता - त्रिभुवन सिंह चौहान, वरिष्ठ पत्रकार प्रवासी केदारवासी सम्मेलन में बिखरे स्थानीय संस्कृति के रंग देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब में रूद्रप्रयाग विकास संघर्ष समिति
लोक-संस्कृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता - त्रिभुवन सिंह चौहान, वरिष्ठ पत्रकार
प्रवासी केदारवासी सम्मेलन में बिखरे स्थानीय संस्कृति के रंग
देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब में रूद्रप्रयाग विकास संघर्ष समिति द्वारा आयोजित प्रवासी केदारवासी सम्मेलन में रंगमंच के कलाकारों ने स्थानीय संस्कृति के रंग बिखेर कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में स्थानीय लोककलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समा बांध दिया।
कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन चौहान थे। इस अवसर पर त्रिभुवन चौहान ने कहा कि आज स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड आन्दोलन की शुरुआत जय बदरी, जय केदार, दे उत्तराखण्ड सरकार के साथ हुई थी परन्तु आज उत्तराखण्ड की लोक विरासत, लोक-संस्कृति, लोक परम्पराओं के साथ आघात किया जा रहा है। जिसके कारण हमारे रीति-रिवाज, लोक परम्पराएं, लोक भाषा तथा लोक संस्कृति विलुप्ति के कगार पर पहुंच गयी है। हमें अपनी लोक संस्कृति को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। स्थानीय स्तर ऐसे कार्यक्रमों को वृहत स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में केदारघाटी से आये अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आशीष बिष्ट, यशवीर बिष्ट, रंगकर्मी राकेश भट्ट, लोककलाकार अनूप नेगी, आनन्द बगवाड़ी, कर्नल(रि.) बिजेंद्र सिंह चौहान, सन्दीप पुजारी, रजनी चौहान, रजनी बिष्ट, कै.(रि.) भरत रावत, कर्नल सुमित गर्ग, पूर्व सैनिक चित्रपाल सजवाण आदि सहित केदारघाटी के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।




